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पाकिस्तान में एक के बाद एक कई आतंकियों का सफाया हो चुका है। अब कराची में हाफिज सईद के एक और करीबी की हत्या कर दी गई। कराची में अज्ञात बंदूकधारियों ने लश्कर-ए-तैयबा के लिए फंड जुटाने वाले अब्दुल रहमान पर ताबड़तोड़ फायरिंग की, जिसमें उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
बताया जा रहा है कि अब्दुल रहमान अहल-ए-सुन्नत वाल जमात का स्थानीय नेता था और कराची में लश्कर के लिए फंड जुटाने का काम करता था। उसके एजेंट पूरे इलाके से फंड एकत्र कर उसके पास जमा करते थे, जिसके बाद वह यह धनराशि हाफिज सईद तक पहुंचाता था। अब्दुल रहमान की हत्या पाकिस्तान में लगातार हो रही आतंकी हमलों और टारगेट किलिंग की कड़ी का हिस्सा मानी जा रही है।
हमले में अब्दुल रहमान का पिता भी घायल
हाफिज सईद के करीबी पर यह हमला उस समय हुआ, जब वह अपने पिता और अन्य लोगों के साथ मौजूद था। अचानक हुई इस ताबड़तोड़ फायरिंग में उसके पिता समेत तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि अब्दुल रहमान की मौके पर ही मौत हो गई। यह हमला पाकिस्तान में बढ़ते आंतरिक संघर्ष और आतंकवादियों के खिलाफ हो रही कार्रवाई का संकेत देता है।
पाकिस्तान में आतंकियों पर हो रहे हमले
पाकिस्तान बीते कुछ सालों से आतंकवाद के गंभीर खतरे से जूझ रहा है। एक ओर बलूचिस्तान में बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) पाकिस्तानी सेना को निशाना बना रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आतंकी संगठनों से जुड़े कई लोग एक-एक कर मारे जा रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि इन हमलों को अंजाम देने वालों का कोई अता-पता नहीं चल पा रहा है।
क्वेटा में मुफ्ती की गोली मारकर हत्या
हाल ही में क्वेटा में अज्ञात हमलावरों ने जमीयत-उलेमा-ए-इस्लाम के मुफ्ती अब्दुल बाकी नूरजई को गोली मारकर हत्या कर दी थी। नूरजई को क्वेटा एयरपोर्ट के पास निशाना बनाया गया था, जहां वह बुरी तरह घायल हो गए और अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इस घटना ने पाकिस्तान में मौलवियों और कट्टरपंथी संगठनों के बढ़ते टकराव को उजागर किया है।
लश्कर का कमांडर भी मारा गया
अब्दुल रहमान से पहले लश्कर-ए-तैयबा के एक शीर्ष कमांडर जिया-उर-रहमान उर्फ नदीम उर्फ कतल सिंधी की पंजाब प्रांत के झेलम इलाके में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। नदीम को लश्कर संस्थापक हाफिज सईद का भरोसेमंद सहयोगी माना जाता था। वह जम्मू-कश्मीर के पूंछ-राजौरी क्षेत्र में आतंकवादी गतिविधियों में शामिल था। 2000 की शुरुआत में उसने जम्मू क्षेत्र में घुसपैठ की थी और 2005 में वापस पाकिस्तान लौट गया था।
पाकिस्तान में आंतरिक कलह और टारगेट किलिंग का सिलसिला जारी
इन हत्याओं से स्पष्ट है कि पाकिस्तान में आतंकी संगठनों के अंदर भी गुटबाजी बढ़ गई है। कई आतंकी गुटों के बीच आपसी रंजिश और वर्चस्व की लड़ाई तेज हो चुकी है। इसके अलावा, यह भी माना जा रहा है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI खुद ही कुछ आतंकियों को निशाना बना रही है, जो अब उसके लिए बोझ बन चुके हैं। हाल के वर्षों में पाकिस्तान में हुई आतंकी हत्याओं की संख्या में तेजी आई है, जिससे वहां की सुरक्षा एजेंसियां भी असमंजस में हैं।
पाकिस्तान में एक तरफ सेना और आतंकियों के बीच टकराव जारी है, वहीं दूसरी तरफ अज्ञात हमलावरों द्वारा आतंकवादियों को टारगेट किया जा रहा है। यह घटनाएं पाकिस्तान में बढ़ते अस्थिरता और आंतरिक संकट को और गहरा करने वाली हैं।
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