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रमजान के महीने में सड़क पर नमाज को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। एक तरफ ईद की तैयारियां जोरों पर हैं, तो दूसरी तरफ दिल्ली में सड़क पर नमाज अदा करने को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। अब इस विवाद में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) भी कूद चुकी है। दिल्ली एआईएमआईएम अध्यक्ष शोएब जमई ने सड़क पर नमाज पढ़ने का समर्थन करते हुए कहा कि यह मेरठ या संभल नहीं, बल्कि दिल्ली है, जहां सड़क पर भी नमाज पढ़ी जाएगी।
शोएब जमई का बयान – ‘दिल्ली में सड़क पर भी होगी नमाज’
शोएब जमई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' (Twitter) पर पोस्ट कर कहा,
"बीजेपी के कुछ बड़बोले नेता दिल्ली में ईद की नमाज को लेकर गलत बयानबाजी कर रहे हैं। उन्हें समझना चाहिए कि यह न तो संभल है और न ही मेरठ, बल्कि यह देश की राजधानी दिल्ली है। यहां मस्जिदों में, ईदगाहों में, घरों की छतों पर, और यदि जगह कम पड़ी तो सड़कों पर भी नमाज होगी।"
इसके साथ ही उन्होंने हिंदू धार्मिक आयोजनों का जिक्र करते हुए कहा कि जब कांवड़ यात्रा के दौरान कई घंटों तक मुख्य सड़कें बंद रह सकती हैं, तो ईद की नमाज के लिए 15 मिनट का समय देना प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है।
बीजेपी का विरोध – ‘सड़क पर नमाज से ट्रैफिक बाधित’
शोएब जमई के इस बयान के बाद राजनीतिक घमासान और तेज हो गया है। बीजेपी नेताओं ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि सार्वजनिक सड़कों पर धार्मिक गतिविधियों को रोकना चाहिए, क्योंकि इससे यातायात बाधित होता है।
बीजेपी नेता तेजिंदर पाल बग्गा ने ट्वीट कर कहा,
"रास्ते बंद कर नमाज पढ़ना जायज है, तो फिर हिंदुओं को भी मंदिर के बाहर आरती करने और सत्संग करने का अधिकार होना चाहिए। दिल्ली की जनता जाम में फंसे, यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।"
वहीं, अन्य भाजपा नेताओं ने कहा कि सड़कें जनता के लिए होती हैं, किसी धर्म विशेष के लिए नहीं।
मुस्लिम नेताओं का पलटवार – ‘धार्मिक स्वतंत्रता पर रोक क्यों?’
AIMIM और अन्य मुस्लिम संगठनों का कहना है कि यह धार्मिक स्वतंत्रता का मुद्दा है। उनका कहना है कि यदि प्रशासन सही व्यवस्था करे तो किसी को कोई समस्या नहीं होगी। उन्होंने तर्क दिया कि देश में कई बार विभिन्न समुदायों के धार्मिक कार्यक्रमों के लिए सड़कें बंद की जाती हैं, फिर नमाज को लेकर इतनी आपत्ति क्यों?
प्रशासन की चुनौती – क्या होगा समाधान?
ईद के नजदीक आने के साथ ही यह मुद्दा और गरमाने की संभावना है। प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यह है कि क्या वह किसी तरह का मध्यस्थ समाधान निकाल सकता है, जिससे विवाद न बढ़े और सार्वजनिक व्यवस्था भी बनी रहे?
क्या यह विवाद आगे बढ़ेगा?
फिलहाल इस मुद्दे को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी बहस जारी है। कई लोगों का मानना है कि प्रशासन को चाहिए कि वह पहले से ही एक वैकल्पिक जगह तय करे, ताकि किसी को परेशानी न हो। वहीं, कुछ लोगों का कहना है कि सड़कों पर किसी भी धार्मिक गतिविधि की इजाजत नहीं होनी चाहिए।
नजरें प्रशासन के फैसले पर टिकीं
देखना होगा कि दिल्ली पुलिस और प्रशासन इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाता है और क्या ईद की नमाज को लेकर कोई विशेष व्यवस्था की जाती है या नहीं।
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